तीन कृषि कानून क्या है (Kisan ke 3 Krishi kanoon kya hai in Hindi) जानिए

tino krishi kanoon kya hai
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आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको तीन कृषि कानून क्या है हिंदी में (Krishi kanoon kya hai in hindi) में पता चल जाएगा. यहाँ बहुत सरे ऐसे लोग हैं. जिन्हें तीन कृषि कानून क्या है और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं. जानकारी के लिए इधर उधर भटकते रहते हैं. इसलिए हिंदी सोफ्टोनिक आपको सभी जानकारी पहुचता हैं. इसलिए हमारे साथ बने रहे है और 3 Krishi kanoon kya hai इसकी जानकारी पढ़े. इसे लोग 

कृषि कानून क्या है (था?) (what is krishi kanoon in Hindi)

तिन कृषि कानून 2020 में लागु हुआ था और इस कानून को केंद्र सरकार ने संसद भवन से पास किया गया था. और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पर अपने हस्ताक्षर किए थे और इस कानून को बनने में सहमति भी जताई थी.

लेकिन इस कृषि कानून के खिलाफ पंजाब राज्य में सबसे ज्यादा विरोध ही रहे है, और न्यूज़ के मुताबिक यह भी बताया जा रहा है कि पंजाब राज्य में सबसे ज्यादा विरोध हो रहा था. इतना ही नही पंजाब में इस कानून के खिलाफ रेल रोको आंदोलन चला. इसके अलावा हरियाणा में भी किसान इसका विरोध कर रहे थे. लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर वो तीन कृषि कानून क्या है? (3 kale kanoon kya hai) निचे पढ़े.

कृषि कानून पर क्या आरोप थे?

इस 3 कृषि कानून के बाद किसान संगठनों द्वारा आरोप था कि इस नए कानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा, जिससे किसानों को नुकसान होगा. नए बिल के मुताबिक, सरकार केवल असाधारण परिस्थितियों में ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को नियंत्रित करेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर) को सुबह 9 बजे राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की. बता दें कि इन तीनों कानूनों के विरोध में कई राज्यों के किसान पिछले एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर खड़े थे. इस रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि 17 सितंबर को लोकसभा में कौन से तीन कृषि कानून पारित हुए और उन्हें लेकर विवाद क्यों हुआ?

तीन कृषि कानून क्या है (3 Krishi kanoon kya hai in Hindi)

यहाँ आप तीनो कृषि कानून (tin Krishi kanoon kya hai) के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर पाएंगे. जिसे 2020 में लागु किया गया था. 

पहला : आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम

इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान किया गया था. यह माना जाता था कि इस कानून के प्रावधानों के कारण किसानों को सही कीमत मिलेगी, क्योंकि बाजार में प्रतिस्पर्धा होगी. बता दें कि साल 1955 के इस कानून में संशोधन किया गया था.

इस कानून का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी को रोकने के लिए आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करना था. महत्वपूर्ण बात यह है कि समय-समय पर कई आवश्यक चीजों को आवश्यक वस्तुओं की सूची में जोड़ा गया है.

उदहारण, कोरोना काल में मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं के रूप में रखा गया था.

दूसरा: कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम

इस कानून के तहत किसान अपनी उपज एपीएमसी यानी कृषि उत्पाद विपणन समिति के बाहर भी बेच सकते हैं. इस कानून के तहत बताया गया कि देश में ऐसा इकोसिस्टम बनेगा, जहां किसानों और व्यापारियों को अपनी फसल को बाजार से बाहर बेचने की आजादी होगी.

प्रावधान के तहत राज्य के भीतर और दो राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई थी. साथ ही मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले खर्च को कम करने का भी जिक्र किया. नए कानून के मुताबिक मंडियों में किसानों या उनके खरीदारों को कोई शुल्क नहीं देना होगा.

तीसरा: मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020 पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता

इस कानून का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों का एक निश्चित मूल्य दिलाना था. इसके तहत किसान फसल उगाने से पहले ही किसी व्यापारी से समझौता कर सकता है. इस समझौते में फसल की कीमत, फसल की गुणवत्ता, मात्रा और उर्वरक के उपयोग आदि को शामिल किया जाना था.

कानून के मुताबिक, किसान को दो-तिहाई राशि फसल की डिलीवरी के समय और बाकी 30 दिनों में चुकानी होगी. इसमें यह प्रावधान भी किया गया कि फसल को खेत से उठाने की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी.

अगर एक पक्ष ने समझौता तोड़ा, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा. माना जाता था कि यह कानून किसानों को कृषि उत्पादों, कृषि सेवाओं, कृषि व्यवसाय फर्मों, प्रोसेसर, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों की बिक्री में शामिल होने के लिए सशक्त बनाता है.

कृषि कानून का विरोध क्यों हुआ?

किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि नया कानून लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथ में चला जाएगा, जिससे किसानों को नुकसान होगा. नए विधेयक के अनुसार, सरकार केवल असाधारण परिस्थितियों में ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को नियंत्रित करेगी. इस तरह के प्रयास अकाल, युद्ध, अप्रत्याशित कीमतों में उछाल या गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किए गए होंगे.

नए कानून में कहा गया कि इन चीजों और कृषि उत्पादों की जमाखोरी पर कीमतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. सब्जियों और फलों के दाम 100 फीसदी से ज्यादा होने पर सरकार इसके लिए आदेश जारी करेगी. नहीं तो खराब होने वाले अनाज के दाम 50 फीसदी तक बढ़ जाते.

किसानों ने कहा कि इस कानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किसानों को न्यूनतम मूल्य बाजार से बाहर मिलेगा या नहीं.

ऐसे में यह संभव हो सकता है कि यदि किसी फसल का अधिक उत्पादन हुआ तो व्यापारी किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने के लिए बाध्य करेंगे.

तीसरा कारण यह था कि सरकार फसलों के भंडारण की अनुमति दे रही है, लेकिन किसानों के पास सब्जियां या फल रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.

Krishi kanoon kya hai in Hindi PDF

 

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