शेखर एक जीवनी क्या है उपन्यास की पात्र, शेखर का चरित्र चित्रण, सारांश समीक्षा

Shekhar Ek Jivani
Shekhar Ek Jivani

यदि आप अभी “शेखर एक जीवन क्या है?” जानकारी लेना चाहते है तो आप बिलकुल सही जगह पर है. यहाँ से आपको Shekhar Ek Jivani की पूरी जानकारी, शेखर का चरित्र चित्रण मिलेगी. इसलिए आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ सकते हैं.

शेखर एक जीवनी क्या है क्या है | Shekhar ek jivani kya hai

शेखर एक जीवनी सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्सयायन अज्ञेय जी का एक मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है. शेखर एक जीवन के दो भाग हैं. जिसका पहला भाग का प्रकाशन 1941 में हुआ था. और दूसरे भाग का प्रकाशन 1944 में हुआ. इस जीवनी में अज्ञेय जी ने बालमन पर पड़ने वाले काम, अहम और भय के प्रभाव तथा उसकी प्रकृति पर मनोवैज्ञानिक तरीके से विचार कर प्रकाश डाला हैं.

शेखर एक जीवनी उपन्यास की पात्र

शेखर – मुख्य पात्र हैं. जो कि “शेखर एक जीवनी उपन्यास” का केंद्रबिंदु है और इसका स्वभाव थोड़ा विद्रोही है, और बंधन से घृणा करता है और बन्धन मुक्त रहने की चाह रखता हैं.

सरस्वती – शेखर की बहन है जो कि शेखर की प्रेरक एवं गुरु भी है.

शारदा – मद्रासी परिवार की लड़की है, स्वभाव चंचल तथा स्पष्ठवादिता. और शेखर इसकी ओर आकर्षित भी होता है.

शशि – यह शेखर की मौसेरी बहन हैं. इसके प्रति भी शेखर आकर्षित होता है. शशि संघर्ष का सामना करने वाली एक स्त्री हैं.

अतिरिक्त पात्र – इसके अन्य शेखर की माँ, माणिका तथा शांति है.

शेखर एक जीवन की पूरी जानकारी(Shekhar Ek Jivani Summary)

‘एक मनोवैज्ञानिक तत्वों के आधार पर शेखर एक जीवनी उपन्यास हैं और यह अज्ञेय का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला उपन्यास में से एक है. लेकिन यह शेखर के जीवनी का लेखा-जोखा बिलकुल नही हैं. लेकिन यह वरन् स्नेह और वेदना का जीवन-दर्शन भी है. जिसमे सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने जीवनानुभवों के विस्तृत तरीके से पिरोया हैं. और यह एक अमर कथा कृति पर प्रकाशित हैं.

शेखर का चरित्र चित्रण – शेखर एक आदर्शवादी सिद्धान्तप्रिय युवक है जो पराधीनता को पसंद नही करते है इसलिए उसे नही स्वीकारते है. वो तर्क कर अपने समाज में परिवर्तन लाना चाहते है. समाज में बदलाव लाने के लिए शेखर बहस की हद तक तर्क करते हैं. वो जेल में अपने मन को खूब खंगालता है, और शारदा के प्रति आकर्षण और शशि के प्रति अगाध स्नेह को जीवन का अर्थ और उद्देश्य समझे हैं. कभी कभी वो पलायनवादी हो जाता है तो कहीं यथार्थवादी!

शेखर एक जीवनी उपन्यास में शेखर के माध्यम से व्यक्तिगत प्रेम भावनाओं के संवेदनात्मक और व्यापक चित्रण के साथ साथ पृष्ठभूमि में विद्रोही मानव के मन और समाज के बीच विरोध की गाथा भी प्रकशित किया गया हैं.

‘अज्ञेय जी” ने एक जीवन में शेखर के बचपन में हुई घटनाओं से उसके विद्रोही, जिज्ञासु, विचारशील, स्वाभिमानी और कठोर होने का पहलुओं को चित्रित किया हैं. शेखर के मन में अथाह प्रश्न है जिसके उत्तर की खोज में वह आता फिरता है.

इस उपन्यास की खाश बात यह है कि इसे पढ़कर पाठक कहीं न कहीं स्वयं के होने का महसूस करता है. और उसमें जीवन को देखने का नवीन दृष्टिकोण भी उत्पन्न हो जाती हैं.

आपको बता दे कि शेखर एक जीवनी उपन्यास के दो भाग ही जो कि कई खंडों में बटा हुआ है. और पाठक को एक ऐसे संसार में ले जाते हैं जहाँ वह स्वयं को भूल ही जाता है और उपन्यास की गहराई में जाकर स्वयं को अधिक पहचान पाता है और यह शेखर एक जीवनी उपन्यास की प्रमुख विशेषताएं में से हैं.

उपन्यास के तीसरे भाग के अप्रकाशित होने के बाद भी उपन्यास में अपूर्णता का थोड़ा भी आभास प्रतीत नहीं होता हैं.

शेखर एक जीवनी का समीक्षा में ‘अज्ञेय जी ’ ने कई स्थानों पर रोजेटी, टेनिसन, कीट्स आदि जैसे पंक्तियों को शेखर के मनोभावों को व्यक्त करने का माध्यम बनाया है ताकी शेखर एक जीवनी या व्यक्तित्व का अनुभव पाठक के लिए सहज हो सकें.

शेखर एक जीवनी आलोचना की बात करे तो ‘शशि’ जो की शेखर की मौसेरी बहन है, शेखर के लिए सप्तपर्ण के तरूण गाछ की छाँह है. शशि के पास शेखर को देने के लिए कुछ नहीं है. पति-परित्यक्ता शशि शेखर के आशीर्वाद-भाव से अपने श्रद्धा-भाव से जोड़ती है और आत्मीयता के वृत्त में धुल जाती है. प्रेम (स्नेह ) की अविरल धारा से जुड़े दो मन, जो असंभव से जीवन में एक-दूसरे को सँभाले हुए हों, और ना ही एक दुसरे को हारने देना चाहते हो.

‘अज्ञेय’ ने पंक्ति में ये भी लिखा है कि “स्नेह एक ऐसा चिकना और परिव्यापक भाव है कि उसमें व्यक्तित्व नहीं रहते हैं. स्नेही को कभी अपने स्नेह पात्र को कभी याद करने की आवश्यकता नही होती, क्योंकि वह उसे कभी भूलता नहीं,”

फिर शशि के जीवन के अन्त को लेखक ने उपन्यास का स्पर्श करने वाला क्षण बना दिया है. “क्या होता है शशि ?” 
उसके बाद शशि चली जाती है, पर शेखर के जीवन में निरंतर प्रेरणा बनकर एक छाया की तर , शशि सदैव उसके साथ शशि.

शेखर एक जीवनी किस विधा की रचना है?

शेखर: एक जीवनी’ का ‘उपन्यास’ विधा पर आधारित रचना है. यह मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ द्वारा रचित है. इसके दो भाग है जिसका पहला का प्रकाशन 1941 में तथा दूसरे भाग का प्रकाशन 1944 में हुआ था. इसमें अज्ञेय ने बालपन पर पड़ने वाले काम, अहम और भय के प्रभाव तथा उसकी प्रकृति पर मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रकाश डाला हैं.

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