सूर्य देवता / सूर्य देव के बारे में जानकारी, (Surya Dev )सूर्य देव को कैसे प्रसन्न करें?

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सूर्य देव के बारे में जानकारी: Surya Dev को कैसे प्रसन्न करें? उनके सारथि, माता -पिता, सूर्यदेव का मंत्र , (Surya dev) सूर्यदेव का चालीश और अन्य 

आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की सूर्यदेव का रथ कौन चलाता है? बहुत सारे असी सवाल है जो सूर्यदेव से और सूर्यदेव के रथ से जुड़ा हुआ हैं. इसलिए आप सूर्यदेव के बारे में जानने के लिए इस आर्टिकल के साथ जुड़े रहें. जैसे की आपको पता है हमारे देश में सूर्य को सूर्य देव से संबोधित किया जाता है. और लोग इनकी पूजा भी करते है. आइये सूर्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पढ़ते हैं .

सूर्य देवता / सूर्य देव के बारे में जानकारी (Surya Dev in Hindi)

सूर्य को वेदों की आत्मा के नाम से जाना गया है. सूर्य के उपस्थिति के करण ही इस पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ हैं. और इसके पीछे विज्ञान भी जुड़ा हैं. लेकिन वैदिक काल में आर्य सूर्य को दुनिया का कर्ताधर्ता माना जाता था.

सूर्य का शब्दा का अर्थ “सर्व प्रेरक” होता हैं. इसका मतलब सर्व प्रकाशक, सर्व प्रवर्तक होने से सर्व कल्याणकारी होता हैं.

बात करे, ऋग्वेद के देवताओं में सूर्य का महत्त्वपूर्ण स्थान हैं साथी ही साथ चक्षो सूर्यो जायत कह कर सूर्य को भगवान का नेत्र माना है. छांदोग्यपनिषद में सूर्य को प्रणव निरूपित कर उनकी ध्यान साधना करने से पुत्र प्राप्ति का वरदान बताया गया है. अगर ब्रह्मवैर्वत पुराण की बात की जाए, तो सूर्य को परमात्मा स्वरूप मानता है. और गायत्री मंत्र सूर्य के परक ही है.

सूर्योपनिषद में सूर्य को ही पूरा जगत की उत्त्पति का एक मात्र कारण निरूपित किया गया है और सूर्य को ही को संपूर्ण जगत की आत्मा तथा ब्रह्म के रूप बताया गया है

यहाँ सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन भी सूर्य ही करते हैं और ये संपूर्ण जगत की अंतरात्मा भी हैं. भारत में वैदिक काल से ही सूर्योपासना का प्रचलन रहा है और ये कोई आश्चर्य की बात नही हैं. पहले सूर्य की उपासना सूर्योपासना मंत्रों से होती थी. उसके बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो यंत्र, तंत्र सूर्य मंदिरों का भी निर्माण हुआ.

भविष्य पुराण में ब्रह्म विष्णु के कथों के माध्यम से एक संवाद में सूर्य पूजा एवं मंदिर निर्माण का महत्त्व समझाया गया है. इसके साथ अन्य पुराणों में यह आख्यान भी मिलता है कि ऋषि दुर्वासा के श्राप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की पूजा – आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पाया था.

वैसे प्राचीन काल में भगवान सूर्य के भी अनेक मंदिर भारत में निर्माण किये गये थे. उनमें आज तो कुछ विश्व के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं.

सूर्य के महत्व का उल्लेख वैदिक साहित्य में ही नहीं बल्कि आयुर्वेद, ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्रों में भी सूर्य का महत्त्व प्रतिपादित किया गया है. आपको बता दे कि हिंदू धर्म साहित्य बहुत ही विस्तृत है जिसमे अंतर्गत अनेको पुराण, वेद, धर्म ग्रंथ व उपनिषद आदि आते हैं.

इन सभी ग्रंथों में ऐसी अनेक रोचक के बारे में चर्चा की गयी जिसके बारे में आपने कभी सुना ही नही होगा. लेकिन आप हिंदीसोफ्टोनिक के साथ जुड़े रहे आपको यहाँ सब कुछ के बारे में जानकारी मिलेगा. आज हम आपको सूर्संय देव से जुड़े कुछ सबंधित कुछ रोचक प्रश्नों के बारे में बताएँगे.

सूर्यदेव का रथ चलाने वाले सारथी का नाम क्या है ? | Suryadev ka Rath Chalane Vale Sarthi Ka Naam Kya hai?

भगवान सूर्य देवता के रथ चलाने वाले सारथी का नाम अरुण है. और गरुड़ उनके छोटे भाई है जो भगवान विष्णु के वाहन हैं. अरुण के माता का नाम विनता है और पिता का नाम महर्षि कश्यप है. धर्म ग्रंथों के अनुसार, अरुण की दो संतान है – जटायु और संपाति.

रामायण में जटायु ने ही माता सीता का हरण के समय रावण से युद्ध किया और और संपाति ने वानरों को लंका का मार्गदर्शन किया.

सूर्य देव के सारथी अरुण के भाई का नाम क्या है? | Surya Dev Ke Sarthi Arun Ke Bhai ka Naam Kya Hai

हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव के सारथी अरुण के भाई का नाम गरुड़ हैं. जो कि भगवान विष्णु के वाहन है. और रामायण में सीता माता के हरण के समय रावण से युद्ध कर मृत्यु को प्राप्त हुए थे.

सूर्य देव की पत्नी का नाम क्या है? (Surya Dev Wife)

सूर्य देव की पत्नी का नाम संज्ञा है जो भगवान विश्वकर्मा की पुत्री हैं. संज्ञा बहुत ही कोमल स्वभाव की स्त्री थी, जबकि सूर्य देव प्रचंड तेजवान थे. विवाह के बाद संज्ञा ने वैवस्वत और यम नामक दो पुत्रों को जन्म दिया और यमुना नामक एक पुत्री को जन्म दिया. 

इतना ही नही सूर्य भगवान की  संज्ञा के अलावे तिन और पत्नियाँ थी राज्ञी, प्रभा, और छाया.

सूर्य देव की माता पिता कौन है? (Surya Dev Mother – Father)

सूर्य देव की माता का नाम  देवी अदिति (mother) है और उनके पिता का नाम महर्षि कश्यप (father) हैं.

सूर्य देव को कैसे प्रसन्न करें?

सूर्य देव को खुश करने का बहुत सारे तरीके है जो आपको इन्टरनेट पर प्राप्त होंगे. जिसमे आपको बहुत बहुत सारे विधि करनी पड़ती है. जो की कुछ लोगो के लिए संभव नही होता हैं. लेकिन यहाँ हम आपको छोटी विधि बताएँगे जिसके माध्यम से आप सूर्यदेवता को आसानी से प्रसन्न कर पाएंगे. ये विधि मैं भी करता हूं.

– एक  लोटे में जल ले लीजिए.

– उसमे गंगाजल डाले, थोड़ी गुड़ या कोई भी मीठा डाले, एक अधऊल का फूल लीजिए (अगर नही है तो कोई बात नही कोई भी लाल फूल ले.)

– उसके बाद सच्चे भाव से, मन को स्थिर कर भगवान सूर्य को जल दीजिए. ऐसे प्रतिदिन करें.

– उसके बाद, आप जो भी चाहेंगे सब कुछ होने लगेगा. ये सत्य हैं. 

सूर्य देव का मंत्र क्या है? (lord Sun Mantra)

यहाँ सूर्य देव का मंत्र दिए गये हैं. लेकिन ये इसके सटीक होने की गारंटी नही है.

  1. ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:
  2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
  3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
  4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।
  5. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।
  6. ॐ सूर्याय नम: ।
  7.  ॐ घृणि सूर्याय नम: ।

सूर्य देव की आरती | ॐ जय सूर्य भगवान (Suryadev ki Arti)

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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आशा करते है आपको ये “सूर्य देवता / सूर्य देव के बारे में जानकारी, उनके सारथि, माता -पिता, और अन्य”  जरुर पसंद आया होगा इसे आप अपने ग्रुप में शेयर करे ताकि सबको इसकी जानकारी प्राप्त हो सकें.

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